मीही खूप विचित्र होतो, इतका विचित्र की मी शरीर नष्ट केले आणि सामानही मिळाले नाही.
वयाची गुजरेगी परीक्षा काय आहे?
दाग ही आपण काय खाल्लं असेल
मला काहीही फरक पडत नाही
नुक्स माझ्याबद्दल काहीतरी आहे
मुझ जो डॉक्टर नाही
हंदन मधील याबद्दल काय
आपली महरूमियां सक्क हैं
हम आश्चर्यचकित आहे की काय आहे कायद्यात?
आधुनिक किंवा मधील फरक जाणून घेणे
अरे काय असेल तर मला अंदाज आहे
शाम है किंवा दुकान-ए-दीद है बँड
दुकान पर्यंत कोणतेही नुकसान नाही.
ऐ मिर सब.हो-ओ-शाम-ए-दिल की शफाक
मी आता तेच करत आहे
बोल्टे क्यूं नहीं मिर हक में
आपण शिकू शकतो. भाषेबद्दल काय?
हमुशी कॅनमध्ये काय करत आहे
हो हो माझ्या अंदाजात काय
दिल की आते हैं त्याने खूप लक्ष दिले
तुमच्या मनात गोंधळ देखील येतो.
मला हे विचारायला नको
अब भी हूँ मैं तिरी अमन में क्या
यूँ जो डॉक्टर है आकाश की तू
आकाशात काय आहे
हाय नसीम-ए-बाहेर सुंदर दिसणारा
त्या जेवणाचे काय?
ही शेवटची साखळी उपलब्ध नाही
फक्त एकच गोष्ट महत्त्वाची होती ती म्हणजे काय
परिस्थिती परिस्थितीमुळेच घडते.
शौक में काहीतरी चूक आहे शौक जिवंत आहे.
तेरा फिराक फ्रॉम-ए-फ्रॉम ऐश काय करायचं
या.आनी टायर फिराक में कहूब शरब एट गा.ई
तेरे विशाल स्वतःला कमवायचा
मनाची स्थिती की थी विनाश आणि गा.ईचा नाश
आम्हाला उम्मीद-ए-नाज म्हणून आम्हाला तुम्हाला द्यायचे आहे
उमर गुजर दिजिए उमर गुजर दी गा.ई
आजपर्यंत असण्याचे आणि वो ये की थोडे दुःख आहे
कुत्र्यात नहीं कहीं गा.ई हा शब्द नाहीं
बा.अद भी तेरे हृदयातून-ए-ए-सारखा नाही
लक्षात ठेवा तुम्ही इथे आहात मग तुम्हालाही आठवते गा.ई
आम्हाला सकाळी आम्हाला नमूद करणारे शरीर आणि पुन्हा
आम्हाला ते शरीर जे वास्तवे एक कबा देखील दिसते ga.ī
मे-बा-मे मे-बा-मे हो-बा-हो त्याला-बा-यम
नाफ-पियाले की टायरला अद्भुत सत्य आठवते ga.ī
कथा अशी आहे की माझा तुमच्याशी काहीतरी संबंध आहे.
लज्जत-ए-हिजर हे शहर-ए-वासलमध्ये देखील उपलब्ध आहे.
सेहन-ए-हयाल-ए-यारमध्ये शब-ए-फरक
जब किंवा चांदना गया जब किंवा चांदनी ग.ī

शायर बनना बहुत आसान हैं.!
बस एक अधूरी मोहब्बत की मुकम्मल डिग्री चाहिए..!!
Shayar banana bahut aasaan hai.!
Bas ek adhoori mohabbat ki mukammal degree chahiye..!!
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मुझ से हर बार नज़रें चुरा लेता है वो ‘फ़राज़’.!
मैंने कागज़ पर भी बना के देखी हैं आँखें उसकी..!!
Mujh se har baar nazaarein chura leta hai wo ‘Firaaj’.!
Maine kagaz par bhi bana ke dekhi hain aankhein uski..!!
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हाथ की लकीरें भी कितनी शातिर है..!
कमबख्त मुट्ठी में है ,लेकिन काबू में नहीं..!!
Haath ki lakeerein bhi kitni shaatir hain.!
Kambakht mutthi mein hai, lekin kaabu mein nahi.!!
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हजारों जवाबों से अच्छी है मेरी खामोशी,!
न जाने कितने सवालों की आबरू रखे।..!!
Hazaaron jawaabon se achhi hai meri khamoshi..!
Na jaane kitne sawaalon ki aabru rakhe..!!
मुझ को ख़ुशियाँ न सही ग़म की कहानी दे दे,
जिस को मैं भूल न पाऊँ वो निशानी दे दे।
“Mujh ko khushiyan na sahi gham ki kahani de de,
Jis ko main bhool na paun woh nishani de de.”
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समय कई जख्म देता है..!
इसीलिए घडी में फूल नहीं काँटे होते हैं ..!!
“Samay kai zakhm deta hai..!
Isiliye ghadi mein phool nahi kaante hote hain..!!”
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एक उम्र के बाद,उस उम्र की बातें !
उम्र भर याद आती है….!!
“Ek umr ke baad, us umr ki baatein!
Umr bhar yaad aati hai….!!”
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यूँ ना छोड़ जिंदगी की किताब को खुला,
बेवक्त की हवा ना जाने कौन सा पन्ना पलट दे।
“Yoon na chhod zindagi ki kitaab ko khula,
Bewaqt ki hawa na jaane kaun sa panna palat de.”
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“रब” ने. नवाजा हमें. जिंदगी. देकर; और. हम. “शौहरत” मांगते रह गये..!
जिंदगी गुजार दी शौहरत. के पीछे; फिर जीने की “मौहलत” मांगते रह गये…!!
ये कफन , ये. जनाज़े, ये “कब्र” सिर्फ. बातें हैं. मेरे दोस्त,,,!
वरना मर तो इंसान तभी जाता है जब याद करने वाला कोई ना. हो…!!
ये समंदर भी. तेरी तरह. खुदगर्ज़ निकला..!
ज़िंदा. थे. तो. तैरने. न. दिया. और मर. गए तो डूबने. न. दिया …!!
क्या. बात करे इस दुनिया. की “हर. शख्स. के अपने. अफसाने. हे..!
जो सामने. हे. उसे लोग. बुरा कहते. हे, जिसको. देखा. नहीं उसे सब “खुदा”. कहते. है…!!
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Rab ne nawaza humein zindagi dekar; aur hum ‘shauharat’ maangte reh gaye..!
Zindagi guzaar di shauharat ke peeche; phir jeene ki ‘mohlat’ maangte reh gaye…!!
Ye kafan, ye janaaze, ye ‘qabr’ sirf baatein hain mere dost,,,!
Varna mar to insaan tabhi jaata hai jab yaad karne wala koi na ho…!!
Ye samandar bhi teri tarah khudgarz nikla..!
Zinda the to tairne na diya aur mar gaye to doobne na diya…!!
Kya baat kare is duniya ki ‘har shakhs ke apne afsane hain..!
Jo saamne hai use log bura kehte hain, jisko dekha nahin use sab ‘khuda’ kehte hain…!!
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जिन्दगी की दौड़ में, तजुर्बा कच्चा ही रह गया.!
हम सीख न पाये ‘फरेब’ और दिल बच्चा ही रह गया ..!!
बचपन में जहां चाहा हंस लेते थे, जहां चाहा रो लेते थे.!
पर अब मुस्कान को तमीज़ चाहिए और आंसुओ को तन्हाई ..!!
हम भी मुस्कराते थे कभी बेपरवाह अन्दाज़ से.!
देखा है आज खुद को कुछ पुरानी तस्वीरों में..!
चलो मुस्कुराने की वजह ढूंढते हैं.!
जिन्दगी तुम हमें ढूंढो… हम तुम्हे ढूंढते हैं ..!!
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Zindagi ki daud mein, tajurba kaccha hi reh gaya.!
Hum seekh na paye ‘fareb’ aur dil baccha hi reh gaya..!!
Bachpan mein jahan chaaha hans lete the, jahan chaaha ro lete the. !
Par ab muskaan ko tameez chahiye aur aansuon ko tanhaai..!!
Hum bhi muskurate the kabhi beparwah andaaz se.!
Dekha hai aaj khud ko kuch purani tasveeron mein..!!
Chalo muskurane ki wajah dhoondhte hain.!
Zindagi tum humein dhoondo… hum tumhe dhoondhte hain..!!

